गाड़ी चलते समय वाइब्रेशन क्यों आता है?

गाड़ी चलते समय वाइब्रेशन क्यों आता है?

जब हम कार लेकर निकलते हैं, तो सबसे ज़्यादा दिक्कत तब होती है जब गाड़ी चलते-चलते हिलने या कांपने लगे। ऐसा लगता है कि गाड़ी रास्ते पर नहीं, बल्कि किसी पुरानी मशीन की तरह थर-थर कांप रही हो। मैं भी कई बार इस स्थिति से गुज़रा हूँ, इसलिए अपने अनुभव और मैकेनिक भाईयों की सलाह के आधार पर यह पूरा ब्लॉग लिख रहा हूँ ।

यह ब्लॉग उन सभी लोगों के लिए है जो रोज़ाना कार चलाते हैं और समझना चाहते हैं कि गाड़ी में वाइब्रेशन क्यों आता है और इसे कैसे ठीक किया जाए तो नीचे दिए गए जरूरी बताओ पर ध्यान देना चाहिए ।

 1. टायर में हवा कम या ज्यादा होना – सबसे आम कारण
हम सोचते भी नहीं, लेकिन कार में सबसे पहले टायर प्रेशर चेक करना चाहिए।
अगर किसी भी एक टायर का प्रेशर कम-ज्यादा हो जाए, तो गाड़ी सीधे नहीं चलेगी और वाइब्रेशन महसूस होगा।

समाधान:

हर 10–15 दिन में टायर प्रेशर चेक करवाएं।

ज़्यादातर कारों में 32–35 PSI ठीक रहता है (मॉडल पर निर्भर करता है)।

 2. व्हील बैलेंसिंग खराब – हाइवे पर सबसे ज्यादा असर
अगर आपकी कार हाई स्पीड पर कांपती है (60–100 kmph), तो 90% मामलों में यह व्हील बैलेंसिंग की दिक्कत होती है।
टायर के वजन में थोड़ा सा भी अंतर हो जाए, तो गाड़ी के स्टीयरिंग में झटके और वाइब्रेशन आने लगते हैं।

समाधान:

हर 6 महीने में व्हील बैलेंसिंग करा लें।

टायर बदला जाए तो भी बैलेंसिंग कराएं।

3. व्हील अलाइनमेंट बिगड़ना – गाड़ी एक तरफ खिंचती है
कई बार वाइब्रेशन तभी आता है जब गाड़ी एक तरफ खिंचती है।
ऐसा तब होता है जब रोड पर गड्ढा लग जाए या टायर का एंगल बिगड़ जाए।

समाधान:

अलाइनमेंट केवल 10–15 मिनट में हो जाता है, खर्चा भी कम।

हर 5000–7000 km पर करा लेना चाहिए।

4. सस्पेंशन में दिक्कत – गाड़ी उछलने लगती है
अगर वाइब्रेशन के साथ-साथ गाड़ी ज़्यादा उछलने लगे तो मामला सस्पेंशन का होता है।
इसमें shocks या bushes खराब हो सकते हैं।

लक्षण:

स्पीड ब्रेकर पर आवाज़

गाड़ी का ज्यादा उछलना

बोनट से thak-thak आवाज

समाधान:

मैकेनिक से चेक कराएं, छोटे पार्ट्स का खर्च कम होता है।

5. इंजन माउंट खराब – इंजन की कंपन सीधे बॉडी तक
अगर गाड़ी स्टार्ट पर ज्यादा हिले या AC ऑन करने पर बॉडी कांपने लगे, तो इसका मतलब इंजन माउंट कमजोर है।

इंजन माउंट क्या होता है?
एक रबर का पार्ट जो इंजन को गाड़ी की बॉडी से जोड़कर रखता है और कंपन रोकता है।

समाधान:

माउंट बदलवा दें, यह बहुत जरूरी पार्ट है।

गाड़ी को ज्यादा समय तक सुरक्षित रखता है।

 6. टायर घिस जाना 
अगर टायर बराबर घिसे नहीं हैं, तो गाड़ी सीधी नहीं चलेगी और हिलना शुरू हो जाएगी।

समाधान:

टायर रोटेशन करवाएं (5000–7000 km में)।

जरूरत हो तो नया टायर लगवाएं।

 7. खराब सड़कों पर चलना – धीरे-धीरे असर दिखता है
भारत में सबसे आम समस्या यहीं है —
गड्ढों वाली सड़कें टायर, रिम, अलाइनमेंट, सब कुछ बिगाड़ देती हैं।

इसलिए अगर आप अक्सर खराब सड़क पर चलते हैं, तो नियमित जाँच बहुत जरूरी है।

अंत में — वाइब्रेशन को कभी हल्के में न लें
कई लोग गाड़ी में आने वाला हल्का वाइब्रेशन नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन ध्यान रखें:

 इससे टायर जल्दी खराब होते हैं
 माइलेज कम होता है
 गाड़ी चलाना असुरक्षित हो जाता है
 इंजन और सस्पेंशन को नुकसान होता है

सबसे आसान उपाय:

हर महीने टायर प्रेशर चेक कराएं

हर 6 महीने में अलाइनमेंट + बैलेंसिंग

गड्ढों से जितना हो सके बचें

समय पर सर्विस कराएं

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