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टॉप मॉडल और बेस मॉडल कार में क्या फर्क होता है?

जब हम नई कार लेने की सोचते हैं, तब सबसे बड़ा कन्फ्यूजन यही होता है कि बेस मॉडल लें या टॉप मॉडल?
बहुत लोग कहते हैं—“भाई, टॉप मॉडल लेना चाहिए, सब फीचर्स आते हैं।”
वहीं कुछ लोग कहते हैं—“क्या जरूरत है इतने पैसे खर्च करने की? बेस मॉडल भी काम चलाता है।”

तो सच क्या है?
दोनों का फर्क क्या है?
किसमें क्या मिलता है, क्या नहीं मिलता?
कौन सा मॉडल किसके लिए सही है?

इसी सबको आज मैं बहुत ही आसान, आम आदमी वाली भाषा में समझाने वाला हूँ, ताकि आपको यह खुद ही साफ़ पता चल जाए कि आपको कौन सा मॉडल लेना चाहिए।

चलिए शुरू करते हैं…


टॉप मॉडल vs बेस मॉडल – सबसे पहले समझें ये मतलब क्या होते हैं

किसी भी कार कंपनी के पास एक ही गाड़ी के कई variants होते हैं।
उदाहरण—Maruti Swift, Tata Punch, Hyundai Creta, Kia Sonet आदि।

इन्हीं variants में:

  • बेस मॉडल (Starting variant) – सबसे सस्ता, सबसे कम फीचर्स

  • मिड मॉडल (Middle variants) – थोड़ा महंगा, थोड़े ज्यादा फीचर्स

  • टॉप मॉडल (Top variant / Fully Loaded) – सबसे महंगा, सबसे ज्यादा फीचर्स

अब सवाल ये कि आखिर यह इतना फर्क क्यों होता है?
तो आइए एक-एक करके हर पहलू समझते हैं।


1. कीमत (Price Difference)

बेस और टॉप मॉडल के बीच कीमत का फर्क काफी बड़ा होता है।
कई बार यह फर्क 1 लाख से लेकर 3–4 लाख तक पहुंच जाता है।

क्यों?
क्योंकि टॉप मॉडल में जो फीचर्स कंपनी देती है, वह महंगे होते हैं—जैसे सनरूफ, टचस्क्रीन, एयरबैग, अलॉय व्हील, कैमरा, सेंसर आदि।

सरल भाषा में —
जितने ज्यादा फीचर, उतना ज्यादा पैसा।


2. सेफ्टी फीचर्स (Safety Features)

आजकल कंपनियाँ सेफ्टी पर थोड़ा ज्यादा ध्यान दे रही हैं, लेकिन फिर भी बहुत फर्क रहता है।

बेस मॉडल में:

  • 2 एयरबैग (driver + co-driver)

  • ABS + EBD (कई कारों में बेसिक)

  • कभी-कभी रियर पार्किंग सेंसर

  • साधारण ब्रेकिंग सिस्टम

टॉप मॉडल में:

  • 4 से 6 एयरबैग

  • Hill assist

  • Traction control

  • Electronic stability control (ESC)

  • 360° कैमरा (कुछ कारों में)

  • Rear view camera

  • TPMS (Tyre pressure monitor)

मतलब:
टॉप मॉडल सुरक्षा के मामले में काफी आगे होता है, जबकि बेस मॉडल सिर्फ जरूरी सेफ्टी तक सीमित रहता है।


3. आराम और सुविधा (Comfort & Convenience Features)

यही सबसे बड़ा फर्क होता है।

बेस मॉडल में:

  • मैनुअल AC

  • मैनुअल विंडो (कई कारों में सामने पावर विंडो भी नहीं होती)

  • सिंपल सीट फैब्रिक

  • बिना टचस्क्रीन

  • नॉर्मल मीटर कंसोल

  • फॉग लैंप नहीं

  • रिमोट लॉकिंग भी नहीं कई बार

टॉप मॉडल में:

  • ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल

  • सभी दरवाजों में पावर विंडो

  • बड़े साइज की टचस्क्रीन

  • Push Start/Stop बटन

  • Keyless Entry

  • क्रूज कंट्रोल

  • Ambient lighting

  • Rear AC vents

  • हाई-क्वालिटी सीट फैब्रिक

यानी टॉप मॉडल में आराम का पूरा ध्यान रखा जाता है।


4. बाहरी डिजाइन (Exterior Differences)

दूरी से देख कर भी पता चल जाता है कि यह टॉप मॉडल है और वो बेस मॉडल।

बेस मॉडल:

  • स्टील रिम (साधारण पहिए)

  • व्हील कवर (Plastic covers)

  • बेसिक हेडलाइट

  • बॉडी कलर ORVM नहीं

  • नॉर्मल ग्रिल डिज़ाइन

  • सनरूफ नहीं (लगभग सभी कारों में)

टॉप मॉडल:

  • अलॉय व्हील

  • LED हेडलाइट और DRL

  • बॉडी कलर बंपर + ORVM

  • सनरूफ / पैनोरमिक सनरूफ

  • स्टाइलिश ग्रिल

  • फॉग लैंप

मतलब टॉप मॉडल देखने में भी ज्यादा आकर्षक और प्रीमियम लगता है।


5. टेक्नोलॉजी और फीचर्स (Technology)

आज के समय में कार सिर्फ कार नहीं रही, एक गैजेट जैसी हो गई है।

बेस मॉडल में:

  • नॉर्मल ऑडियो सिस्टम (कभी-कभी वो भी नहीं)

  • 2 स्पीकर

  • USB/AUX

  • बेसिक MID स्क्रीन

टॉप मॉडल में:

  • बड़ा टचस्क्रीन

  • Android Auto + Apple CarPlay

  • 4–6 स्पीकर और ट्विटर्स

  • नेविगेशन

  • वायरलेस चार्जिंग

  • ब्लूलिंक / कनेक्टेड कार फीचर्स

यानी टॉप मॉडल टेक्नोलॉजी में पूरी तरह आगे है।


6. इंजन और परफॉर्मेंस (Engine & Performance)

यहां अच्छी बात यह है कि इंजन लगभग हर मॉडल में एक जैसा ही होता है, चाहे आप बेस लें या टॉप।

फर्क सिर्फ फीचर्स में होता है, शक्ति (power) में नहीं।

हाँ, टॉप मॉडल में कुछ चीजें अधिक होती हैं:

  • Drive modes

  • Traction modes

  • Paddle shifters

पर बेसिक परफॉर्मेंस दोनों में एक जैसी रहती है।


7. मेंटेनेंस (Maintenance Difference)

कई लोग यह गलती से मान लेते हैं कि टॉप मॉडल का मेंटेनेंस ज्यादा महंगा होता है।
असल में ऐसा नहीं है।

Maintenance almost same होता है, क्योंकि इंजन तो सभी में एक जैसा है।

हाँ, कुछ चीजें टॉप मॉडल में होती हैं जो खराब हों तो महंगी होती हैं—जैसे:

  • LED headlamp

  • Touchscreen

  • Sensors

  • Sunroof

लेकिन सामान्य सर्विस की लागत दोनों में एक जैसी ही रहती है।


8. बेस मॉडल किसके लिए अच्छा है?

अगर आप:

  • बजट में कार लेना चाहते हैं

  • ज्यादा फीचर की जरूरत नहीं

  • साधारण चलाने के लिए कार चाहिए

  • खुद बाद में एक्सेसरी लगवाना चाहते हैं

तो बेस मॉडल आपके लिए बेस्ट ऑप्शन है

बहुत लोग ऐसा भी करते हैं कि बेस मॉडल लेते हैं और फिर:

  • Alloy wheels

  • Touchscreen

  • Reverse camera

  • Seat covers

बाजार से लगवा लेते हैं।
इससे पैसे भी बच जाते हैं और फीचर्स भी आ जाते हैं।


9. टॉप मॉडल किसके लिए सही है?

अगर आप:

  • कार में हर फीचर चाहते हैं

  • सुरक्षा (Safety) को सबसे ऊपर रखते हैं

  • ज्यादा लग्जरी और सुविधाएँ पसंद करते हैं

  • बाद में कुछ इंस्टॉल नहीं करवाना चाहते

तो टॉप मॉडल आपके लिए सही है।

टॉप मॉडल की खास बात यह है कि सब कुछ कंपनी फिटेड होता है, कोई टेंशन नहीं रहता।


10. मेरी सलाह – कौन सा मॉडल लें?

देखिए, हर इंसान का बजट और जरूरत अलग होती है।
इसलिए एकदम सीधी सलाह देता हूँ:

अगर आपका बजट tight है:

बेस मॉडल लें + जरूरी एक्सेसरी लगवा लें।
कम पैसे में आपको अच्छी कार मिल जाएगी।

अगर आप safety और comfort चाहते हैं:

मिड या टॉप मॉडल लें।
ये लंबे समय में ज्यादा वैल्यू देते हैं।

अगर आप फीचर के शौकीन हैं:

टॉप मॉडल ही सही है।
कंपनी फिटेड चीजों का मज़ा ही अलग होता है।


निष्कर्ष (Conclusion)

बेस मॉडल और टॉप मॉडल दोनों अपनी जगह सही हैं।

  • बेस मॉडल — बजट-फ्रेंडली, साधारण सुविधाएँ, बाद में कस्टमाइजेशन की सुविधा

  • टॉप मॉडल — शानदार फीचर्स, बेहतर सुरक्षा, ज्यादा आराम, प्रीमियम लुक

आखिरकार कार वही अच्छी होती है जो आपकी जेब और आपकी जरूरत दोनों को फिट आए

अगर आपका बजट कम है तो बिल्कुल मत सोचिए, बेस मॉडल भी शानदार चलता है।
और अगर आप फीचर्स और कम्फर्ट प्रेफर करते हैं, तो टॉप मॉडल निश्चित रूप से बेहतर है।

उम्मीद है अब आपको पूरा फर्क समझ में आ गया होगा।

sandeepuri12@gmail.com

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